मोरी मटकी उलट के पलट गयो रे

नन्द रानी जबर बेयो रे,
मोरी मटकी उलट के पलट गयो रे,

मुस्कान इसकी लगे प्यारी प्यारी,
दीवानी हुई इसकी सारी ब्रिज रा री,
एह की मुरली पे जियो अटक गयो रे,
मोरी मटकी उलट के पलट गयो रे,

पनघट पे आके करे जोरा जोरि,
चुपके से आके करे चीर चोरी,
मइयां हल्लो मचो तो सटक गयो रे,
मोरी मटकी उलट के पलट गयो रे,

घर घर में जाके जो माखन चुरावे,
खावे सो खावे सभी पर गिरावे,
एहने रोकने हमरो खटक गयो रे,
मोरी मटकी उलट के पलट गयो रे,

मैं तो दुखारी गरीबी की मारी,
नहीं जोर चाला तो दी मैं गाली,
नंदू भइया कन्हियो छटक गयो रे,
मोरी मटकी उलट के पलट गयो रे,
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