करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं स्वीकार करो माँ

करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं, स्वीकार करो माँ,
मझधार में मैं अटकी, बेडा पार करो माँ।
हे माँ संतोषी,माँ संतोषी॥

बैठी हूँ बड़ी आशा से तुम्हारे दरबार में,
क्यूँ रोये तुम्हारी बेटी इस निर्दयी संसार में।
पलटादो मेरी भी किस्मत, चमत्कार करो माँ,
मझधार में मैं अटकी, बेडा पार करो माँ॥

मेरे लिए तो बंद है दुनिया की सब राहें,
कल्याण मेरा हो सकता है, माँ आप जो चाहें।
चिंता की आग से मेरा उद्धार करो माँ,
मझधार में मैं अटकी, बेडा पार करो माँ॥

दुर्भाग्य की दीवार को तुम आज हटा दो,
मातेश्वरी वापिस मेरे सुहाग लौटा दो।
इस अभागिनी नारी से कुछ प्यार करो माँ,
मझधार में मैं अटकी, बेडा पार करो माँ॥


karti hun tumhara vrat main, svikaar karo maa,
majhdhaar me main atki, beda paar karo maa.
he maa santoshi, maa santoshi.

baithi hun badi aasha se tumhaare darbaar me,
kyun roye tumhaari beti is nirday sansaar me.
paltaado meri bhi kismat, chamatkaar karo maa,
majhdhaar me main atki, beda paar karo maa.

mere liye to band hai duniaa ki sab raahen,
kalyaan mera ho sakta hai, maa aap jo chaahen.
chinta ki aag se mera udhaar karo maa,
majhdhaar me main atki, beda paar karo maa.

durbhagya ki deevar ko tum aaj hata do,
maateshvari vaapas mere sohaag lauta do.
ik abhaagini naari se kuch pyaar karo maa,
majhdhaar me main atki, beda paar karo maa.
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