खूब लड़ी मर्दानी वह थी झांसी वाली रानी

बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी |
खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी ||

इस समाधि में छिपी हुई है, एक राख की ढेरी |
जल कर जिसने स्वतंत्रता की, दिव्य आरती फेरी ||

यह समाधि यह लघु समाधि है, झाँसी की रानी की |
अंतिम लीलास्थली यही है, लक्ष्मी मरदानी की ||

यहीं कहीं पर बिखर गई वह, भग्न-विजय-माला-सी |
उसके फूल यहाँ संचित हैं, है यह स्मृति शाला-सी |

सहे वार पर वार अंत तक, लड़ी वीर बाला-सी |
आहुति-सी गिर चढ़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी |

बढ़ जाता है मान वीर का, रण में बलि होने से |
मूल्यवती होती सोने की भस्म, यथा सोने से ||

रानी से भी अधिक हमे अब, यह समाधि है प्यारी |
यहाँ निहित है स्वतंत्रता की, आशा की चिनगारी ||

जाओ रानी याद करेंगे ये कृतज्ञ भारत वासी |
तेरा यह बलिदान जगावेगा स्वतन्त्रता अविनाशी |

होवे चुप इतिहास लगे सच्चाई को चाहे फ़ासी |
तेरा स्मारक तू ही होगी,तू खुद अमिट निशानी |
बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी |
खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी ||
झांसी वाली रानी...झांसी वाली रानी.....

गायिका - माधुरी मिश्रा
संगीत - माधुरी मिश्रा
गीत - सुभद्रा कुमारी चौहान

स्वर - माधुरी मिश्रा
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